बौद्धिष्ट रिति-रिवाज से संविधान को साक्षी मानकर कपल ने रचाएं शादी।

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  • पाखंडवाद और अंधविश्वास को त्यागने से ही होगा समाज में समुचित विकास।
  • बौद्धिष्ट रिति-रिवाज से संविधान को साक्षी मानकर रचाएं शादी।
  • संविधान पर हाथ रख पंचशील का शपथ लिया।

अंधविश्वास व पाखंडवाद को त्याग कर आधुनिकता को नये आयाम देते हुए इस कलम युग में भारतीय संविधान को साक्षी मानकर पंचशील का शपथ लेते हुए कपल नव दाम्पत्य जीवन का शुरुआत किया।

वर-वधु शादी मंडप में अपने स्जवनों के साथ।

जी हां यह वाक्या बिहार राज्य के बेगूसराय जिला स्थित गढ़पुरा प्रखंड के कुम्हारसों पंचायत स्थित बुजुर्गाबाद निवासी रामप्रकाश राम के सुपुत्र भूषण कुमार (बिहार पुलिस) ने बिहार के ही मुंगेर ज़िला के मुंगेर प्रखंड स्थित कुतलुपुर पंचायत के बहादुर नगर निवासी प्रभु नंदन दास के सुपुत्री निधि कुमारी के साथ अपने-अपने समाज के समक्ष शादी मंडप में बौद्धिष्ट रिति-रिवाज के अनुसार

शादी मंडप में पंचशील पढ़ाते भान्ते बुद्ध प्रकाश।

भारतीय संविधान पर हाथ रखकर पंचशील का शपथ लेते हुए ताउम्र भर साथ निभाने की एक दूसरे ने शुभ रश्मे में कसमें खाएं तथा अपने -अपने माता-पिता, समाज व श्रेष्ठ जनों से आशीर्वाद लेकर नवविवाहित जीवन की शुरुआत किए।