गढ़पुरा प्रखण्ड के रजौड़ पंचायत अन्तर्गत मध्य विद्यालय मछराहा बना मुखिया जी का गिट्टी-बालू रखने का डिपो।

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गढ़पुरा(बेगूसराय) : बेगूसराय जिले के गढ़पुरा प्रखण्ड अन्तर्गत रजौड़ पंचायत भवन स्थित सरकारी मध्य विद्यालय मछराहा के प्रांगण में अवैध रूप से बालू-गिट्टी रखना या डीपो चलाना संवैधानिक रूप से गलत है । सरकार एक तरफ  विद्यालय में मैदान इसलिए बनाते हैं कि विद्यालय के बच्चे प्रार्थना कर सके , खेलें-कूदें तथा विद्यालय के अन्य सभी कार्यक्रमों को विद्यालय के प्रांगण में ही आयोजित  हो । यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने शिक्षा विभाग के आला अधिकारी से शिकायत नहीं किये , दूसरी ओर प्रधानाध्यपक भी मुखिया पति से दहशत में रहते होंगे ।

मध्य विद्यालय मछराहा , रजौड़ के प्रांगण में बालू की ढ़ेर की तस्वीर ।

इसकेे वाबजूद भी कभी-कभार यहां के स्थानीय ग्रामीणों को जगह के अभाव के कारण विद्यालय के प्रांगण में प्रधानाध्यापक व विद्यालय शिक्षा समिति के सहमति से बराती रखना या अन्य किसी भी तरह के सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों को कर पाते हैं । लेकिन कोई भी कार्यक्रम विद्यालय के प्रांगण में प्रधानाध्यापक के सहमति से होता है । परंतु गढ़पुरा प्रखंड के ग्राम पंचायत राज रजौड़ स्थित एक सरकारी विद्यालय उत्क्रमित मध्य विद्यालय मछराहा रजौड़ है ।

गिट्टी की ढ़ेर की तस्वीर ।

जिस विद्यालय के प्रांगण में गत पंचवर्षीय की भांति , इस पंचवर्षीय के शुरुआत होते हीं रजौड़ पंचायत के वर्तमान मुखिया पति ओम प्रकाश यादव के द्वारा गिट्टी-बालू रखकर विद्यालय के प्रांगण को डिपों के रूप में बदला जा चुका है । जिसका विरोध कर पाना विद्यालय के प्रधानाध्यापक को हिम्मत नहीं तथा ग्रामीणों को फुर्सत नहीं । इस पंचायत के युवाओं का कहना है कि पिछले वर्ष जब हमलोग मैदान में वॉलीबॉल खेलने के लिए दो लोहे के पिलड़ गाड़े थे तो उसको मुखिया पति ओम प्रकाश यादव ने अपने आदमी लगवा कर उखड़वा दिए तथा ट्रैक्टर चलवाकर मैदान को जोतवा दिए  ।

जो कहीं ना कहीं एक मुखिया पति को मुखिया होने का धौंस तथा दबंगता को दर्शाता है । इनके खिलाफ में कोई बोल भी नहीं सकते हैं क्योंकि यह मुखिया के पति हैं यदि कोई ग्रामीण बोल भी दिया तो उनको प्रत्यक्ष रूप से नहीं बल्कि उनको अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक , आर्थिक तथा मानसिक सभी तरह से प्रताड़ित किया जाता है ।

एक सार्वजनिक सरकारी विद्यालय में इस प्रकार का कार्य कहीं ना कहीं शिक्षा विभाग के ऊपर एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देता है ? यदि शिक्षा विभाग व प्रखंड विकास पदाधिकारी इन बातों पर प्रशासनिक रूप से थोड़ा भी ध्यान दे दिया होता तो आज इस तरह की नौबत देखने को नहीं मिलता । अब ग्रामीणों को देखना है कि यह सिलसिला कितने दिनों तक चलनेवाला है ।