कांग्रेस ने राम मंदिर निर्माण का स्वागत किया

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नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस अब राम मंदिर निर्माण में पार्टी के योगदान को रेखांकित करने में जुट गई है, जिसके लिए भूमि पूजन समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में बुधवार को अयोध्या में होने वाला है।

कांग्रेस नेता बयान दे रहे हैं, ताकि वे इस ऐतिहासिक समारोह अलग-थलग न दिखें।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक सद्भाव का प्रतीक होगा।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में अपने निवास पर हनुमान चालीसा का पाठ किया और कहा कि हम मध्य प्रदेश के लोगों की ओर से अयोध्या में 11 चांदी की ईटें भेज रहे हैं। कल (बुधवार) वह ऐतिहासिक दिन है, जिसके लिए पूरा देश इंतजार कर रहा था।

कांग्रेस के प्रवक्ता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने भी इस अवसर पर देश के लोगों को बधाई दी। सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का कांग्रेस ने पहले ही स्वागत किया है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। कांग्रेस नेता अब श्रेय लेने कोशिश कर रहे हैं क्योंकि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी मंदिर का निर्माण करना चाहते थे।

मंदिर ट्रस्ट ने आधिकारिक कार्यक्रम के लिए कांग्रेस को आमंत्रित नहीं किया है, और कांग्रेस इसे लेकर कोई विवाद नहीं चाहती है और पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा कि अतिथि सूची तय करने के लिए ट्रस्ट का विशेषाधिकार है। मंगलवार को पार्टी ने कहा कि यह खुशी की बात है कि आखिरकार राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद ने कहा, कांग्रेस पार्टी ने पहले ही राम मंदिर के निर्माण का स्वागत किया है। यह हर हिंदू के लिए और व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए भी आस्था की बात है। मुझे खुशी है कि राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में, जहां कांग्रेस सत्ता में है, सरकार ने एक नया पर्यटन सर्किट शुरू किया है, जो उन सभी महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ेगा, जिनके बारे में कहा जाता है कि भगवान राम ने अयोध्या से अपने वनवास के दौरान दौरा किया था। राज्य सरकार ने राम वन गमन पथ के लिए 75 स्थानों की पहचान की है।

कांग्रेस दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा मंदिर के मुद्दे पर किए गए कार्यों को बता रही है।

पार्टी के नेता कह रहे हैं कि राजीव गांधी पहले शख्स थे जिन्होंने मंदिर के मुद्दे पर गंभीर कदम उठाया था। जब वह प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने राम मंदिर के ताले खोलने की अनुमति दी और फिर 1989 में शिलान्यास सुगम किया।

पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान 1992 में विवादित मस्जिद का विध्वंस हुआ और उनकी सरकार में भूमि का अधिग्रहण किया गया था।

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Congress welcomed the construction of Ram temple
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